मसीही धर्म में, सबसे ज्यादा चर्चित समस्या “पापों से उद्धार” और “पवित्र आत्मा का अंतर्निवास” है। हालाँकि, इस बात को जानते हुए की मसीही धर्म में यह दोनों बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है, कुछ लोगों के पास इन दोनों के बारे में सटीक ज्ञान है। सबसे बुरी बात यह है की, हम बाइबल आधारित किसी भी लेख को नहीं पाते जो ऊपर दी गई समस्याओं के बारे में हमें स्पष्ट रूप से सिखाते हो। ऐसे कई मसीही लेखक है जो पवित्र आत्मा के वरदानो या आत्मा से भरे जीवन के बारे में लिखते है। लेकिन उनमें से कोई भी इस मुख्य प्रश्न को पूछने की हिम्मत नहीं करता की, “एक विश्वासी कैसे निश्चित तौर पर पवित्र आत्मा को पा सकता है?” क्यों? अचंबित कर देनेवाला सत्य यह है की वे इसके बारे में विस्तृत रूप से नहीं लिखते क्योंकि उनके पास इसके बारे में सटीक ज्ञान नहीं है। जैसे भविष्यवक्ता होशे ने कहा है, “मेरी प्रजा ज्ञान के अभाव के कारण नाश हो रही है”, इन दिनों, कुछ मसीही पवित्र आत्मा पाने की आशा में धार्मिक कट्टरवाद में नहीं है। वे ऐसा विश्वास करते है की वे आवेश और उन्माद की स्थिति में पहुँचकर पवित्र आत्मा को पा सकते है। लेकिन यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा की उनके कहे जानेवाले विशवास ने मसीही धर्म को एक शमनवाद बना दिया है, और ऐसी कट्टरता शैतान की ओर से आती है।
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