अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम - पुलिस के बेटे से लेकर 'ग्लोबल टेररिस्ट' तक की विस्तृत कहानी "दुनिया के सबसे खूंखार अपराधियों की लिस्ट में शुमार, जिस पर 25 मिलियन डॉलर (करीब 200 करोड़ रुपये) का ईनाम है [1]... यह कहानी है एक पुलिस वाले के बेटे की, जो डोंगरी की गलियों से उठकर अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह और फिर 'ग्लोबल टेररिस्ट' बन गया। यह कहानी है दाऊद इब्राहिम कास्कर की।" दाऊद इब्राहिम कास्कर का जन्म 26 दिसंबर 1955 को महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के खेड़ में एक कोंकणी मुस्लिम परिवार में हुआ था [2, 3]। उसके पिता, इब्राहिम कास्कर, मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच में हेड कांस्टेबल थे और मां अमीना बी एक गृहिणी थीं [3, 4]। दाऊद मुंबई के डोंगरी इलाके (तेमकर मोहल्ला) में पला-बढ़ा और अहमद सेलर हाई स्कूल से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी 5 दाऊद का पहला बड़ा अपराध 4 दिसंबर 1974 को हुआ [6]। तत्कालीन डॉन हाजी मस्तान से बदला लेने के लिए दाऊद और उसके गुर्गों ने एक टैक्सी लूटी, उन्हें लगा कि उसमें मस्तान का पैसा है [6]। लेकिन वो पैसा असल में मेट्रोपॉलिटन बैंक का था (4,75,000 रुपये) और यह उस दशक की सबसे बड़ी बैंक डकैती बन गई [7]। जब दाऊद के पिता को पता चला कि इस बैंक डकैती में उनके बेटे का हाथ है, तो उन्होंने उसकी बेल्ट से जमकर पिटाई की और उसे पुलिस थाने ले जाकर जुर्म कबूल करवाया [8, 9]। जल्द ही दाऊद ने अपने भाई शब्बीर के साथ मिलकर 'डी-कंपनी' (D-Company) बनाई [10]। 1981 में, पठान गैंग के समद खान ने दाऊद के भाई शब्बीर की बेरहमी से हत्या कर दी [11, 12]। भाई की मौत ने दाऊद को खून का प्यासा बना दिया और 1984 में उसने समद खान को मौत के घाट उतार दिया [11, 12]। पुलिस की बढ़ती सख्ती और समद खान की हत्या के मुकदमों से बचने के लिए 1986 में दाऊद भारत छोड़कर दुबई भाग गया [3, 11]। दुबई से उसने अपने साम्राज्य को एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट में बदल दिया जो सोने की तस्करी से लेकर ड्रग्स (हेरोइन) और हथियारों की तस्करी तक फैल गया [3, 13]। दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके बाद हुए दंगों ने डी-कंपनी को पूरी तरह बदल दिया [14]। दाऊद ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से हाथ मिलाया [15]। 12 मार्च 1993 को मुंबई में 13 सिलसिलेवार बम धमाके हुए [15]। दाऊद ने ISI के साथ मिलकर 4,000 किलो RDX, 2,000 AK-47 और ग्रेनेड मुंबई पहुंचाए थे [16, 17]। इन धमाकों में 257 मासूम लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए [15]। इसके बाद दाऊद पाकिस्तान के कराची भाग गया [18]। 2003 में अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र (UN) ने दाऊद को अल-कायदा से संबंधों के चलते 'ग्लोबल टेररिस्ट' (वैश्विक आतंकवादी) घोषित कर दिया **अंडरवर्ल्ड का पैसा मुंबई के रियल एस्टेट में भी लगा।** दाऊद की डी-कंपनी ने 1990 और 2000 के दशक में 'सारा और सहारा शॉपिंग सेंटर' जैसी इमारतें मुंबई में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से तान दीं [28]। इसके अलावा 'खटाऊ मिल' के विवादित ज़मीन सौदे में भी दाऊद शामिल था, जिसमें मिल मालिक सुनीत खटाऊ की हत्या कर दी गई थी [29, 30]। दाऊद ने अपनी पारिवारिक जड़ें पाकिस्तान में मजबूत कीं। 2006 में उसकी बेटी माहरुख की शादी मशहूर पाकिस्तानी क्रिकेटर जावेद मियांदाद के बेटे जुनैद से हुई [31]। हालांकि, उसका इकलौता बेटा मोइन अपराध की दुनिया से दूर होकर 'मौलाना' बन गया और अब कराची की एक मस्जिद में कुरान पढ़ाता है [31]। सालों तक पाकिस्तान दाऊद की मौजूदगी से इंकार करता रहा। लेकिन अगस्त 2020 में FATF के दबाव में पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक दस्तावेज़ों में दाऊद इब्राहिम के कराची स्थित तीन पतों को स्वीकार किया: क्लिफ्टन इलाके का 'व्हाइट हाउस', नूराबाद का एक बंगला और डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी का घर [32, 33] भारत सरकार लगातार दाऊद की आर्थिक कमर तोड़ रही है। **मार्च 2026 की एक बड़ी घटना** में, सफेमा (SAFEMA) के तहत महाराष्ट्र के रत्नागिरी (मुंबके गांव) में स्थित दाऊद की 4 पुश्तैनी ज़मीनों को नीलाम कर दिया गया [34, 35]। 2017 से 2025 तक चार बार इन ज़मीनों को नीलाम करने की कोशिश की गई थी, यहाँ तक कि बेस प्राइस भी 30% गिराया गया, लेकिन दाऊद और डी-कंपनी के खौफ से कोई भी इन्हें खरीदने आगे नहीं आया था [36]। अंततः 2026 में मुंबई के एक निवेशक ने साहस दिखाते हुए इस ज़मीन को खरीद लिया, जो इस बात का सीधा संकेत है कि अब अंडरवर्ल्ड डॉन का खौफ भारत में खत्म हो रहा है [35]।
LUIS NOIR
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