बंजारा मन यादों की रेगिस्तान में बंजारा सा भटक रहा ख्वाबों को पानी नसीब नही धूप में यूंही पिघल रहा। किससे पूछूं अपने मर्ज की दवा इस सहरा में यहां किसी को पानी नसीब नही।
kistu kumari
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